Computer की विशेषताएं –
कंप्यूटर पर हम कार्य को सरलता से और बहुत ही कम समय में कार्य करते है कंप्यूटर पर कार्य करने के निम्न विशेषताएं है –
1. Computer एक Electronic Machine है जो हमारे द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार परिणाम प्रस्तुत करता है।
2. कंप्यूटर की सहायता से हम देश – विदेश की पूरी जानकरी कुछ ही सेकंड में जान सकते है।
3. कंप्यूटर हमारे जीवन का ऐसा हिस्सा जिसके बिना हमारा बहुत सारे कार्य नहीं हो पाते ।
4. कंप्यूटर के आने से लोग अपने बहुत सरे कार्य घर पर ही कर लेते है ।
5. कंप्यूटर की सहायता से हम अपने कार्य को बहुत ही काम समय में कर सकते है ।
6. आज के समय में कंप्यूटर का उपयोग Smart Class के लिए भी किये जा रहे है ।
7. कंप्यूटर से आज लोग YouTube या Blogger/Website बनाकर घर बैठे पैसा कमा रहे है ।
8. कंप्यूटर एक मनोरंजन का साधन भी है ।
9. कंप्यूटर का उपयोग स्कूल कॉलेज में भी Student को पढ़ाने के लिए किया जा रहा है ।
Development of Computers
(कंप्यूटर का विकास)
The Abacus (एबाकस )
कम्प्यूटर का विकास क्रम 3000 वर्ष पुराना है। चीन ने सबसे पहले गणना यंत्र अबेकस का आविष्कार किया था। यह एक यांत्रिक डिवाइस है। इस मशीन को एडिंग मशीन कहते थे। क्योंकि यह मशीन केवल जोड़ या घटा सकती थी।
Pascal and the Pascaline Blaise (ब्लेज पास्कल तथा पास्कलाइन)
17वीं शताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र सन् 1645 में विकसित किया था। यह एक यांत्रिक डिवाइस है। इस मशीन को एडिंग मशीन कहते थे। क्योंकि यह मशीन केवल जोड़ या घटा सकती थी।
Jacquard Loom (जेकार्ड्स लूम)
सन् 1801 में फ्रांसीसी बनुकर जोसेफ ने कपड़े बुनने के ऐसे लूक का आविष्कार किया जाता कपड़ों में स्वतः ही डिजाइन या पैटर्न देता था।
Charles Babbage’s Difference Engine (चार्ल्स बैबेज का डिफरेंस इंजिन)
चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 (Golden Year of Computer History) में एक मशीन का निर्माण किया जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने वहन किया। उस मशीन का नाम डिफरेन्स इंजिन रखा गया। इस मशीन में गियर और शाफ्ट लगे थे। और यह भाप से चलती थी।
Herman Hollerith Census Tabulator (हर्मन होलेरिथ सेंसस टेबुलेटर)
सन् 1890 में कम्प्यूटर इतिहास में एक और महत्त्वपूर्ण घटना हुई, वह थी अमेरिका का जनगणना का कार्य । सन् 1890 से पूर्व जनगणना का कार्य पारम्परिक तरीकों से किया जाता था।
Dr. Howard Aiken and The Mark 1 (डॉ. हॉवर्ड आइकेन और मार्क -1)
सन् 1940 में (Electromechanical Computing) अपने शिखर पर पहुँच चुकी थी। आई बी एम के चार शीर्ष इंजीनियरों व हॉर्ड आईकेन से सन् 1944 में एक मशीन को विकसित किया और इसका अधिकारिक नाम Automatic Sequence Controlled Calculator रखा।
The Atanasoff & Berry Computer (एटानासोफ बेरी कम्प्यूटर)
आइकेन और बी एम के मार्क-1 तकनीकी नई इलैक्ट्रॉनिक्स तकनीकी आने से पुराने हो गई थी। नई इलैक्ट्रॉनिक्स तकनीकी में कोई यांत्रिक पुर्जा संचालित करने की आवश्यकता नहीं थी। जबकि मार्क 1 एक विद्युत – मशीन है।
The ENIAC (1943-46)
इस कम्प्यूटर का पूरा नाम Electronic Numerical Integrator and computer है इसका विकास आर्मी के लिए किया गया था।
The EDVAC (1946-52)
इस का पूरा नाम Electronic Discrete Variable Automatic Computer था यह पहला डिजिटल कम्प्यूटर था।
The EDSAC (1947-49)
इस का पूरा नाम था । Electronic Delay storage Automatic Computer यह पहला कम्प्यूटर था जिस पर प्रोग्राम को रन किया गया था।
The UNIVAC (1951)
इस का पूरा नाम Universal Automatic Computer था। यह पहला डिजिटल कम्प्यूटर था। और यह व्यापार में प्रयोग होने वाला प्रथम कम्प्यूटर था।
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कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ –
प्रथम पीढ़ी (1940-1956)
कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी की शुरूआत 1940 से मानी जाती है। इस जनरेशन Vacuum Tube Technology में का प्रयोग किया गया था। इसमें मशीन भाषा का प्रयोग किया गया था। इसमें मेमोरी की तौर पर चुम्बकीय टेप एवं पचकार्ड का प्रयोग किया जाता था। इस पीढ़ी के कुछ कम्प्यूटरों के नाम इस प्रकार है-
एनियक (ENIAC), एडसैक (EDSAC) एडवैक (EDVAC), यूनीवैक 2 (UNIVAC-2), आईबीएम 701, आईबीएम 650, मार्क-2, मार्क-3, बरोज 2202 (ENIAC)
द्वितीय पीढ़ी (1956-1963)
द्वितीय पीढ़ी की शुरूआत 1956 से 1963 तक मानी जाती है। इस पीढ़ी में Transistor का प्रयोग किया गया है जिसका विकास William Shockly ने 1947 में किया था। इसमें असेम्बली भाषा का प्रयोग किया गया था। इसमें मेमोरी के तौर पर चुम्बकीय टेप का प्रयोग किया जाने लगा था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में आईबीएम 1401 प्रमुख हैं, जो बहुत ही लोकप्रिय एंव बड़े पैमाने पर उत्पादित किया गया था।
इस पीढ़ी के अन्य कम्प्यूटर थे IBM 1602. IBM-7094, CDS-3600, – RCA 501 यूनिवेक 1107 आदि
तीसरी पीढ़ी (1964-1971)
कम्प्यूटर की तीसरी पीढ़ी की शुरूआत 1964 से मानी जाती है। इस जनरेशन में आई सी का प्रयोग किया जाने लगा था IC का पूरा नाम Integrated Circuit है। IC का विकास 1958 में Jack Kilby ने किया था। इसमें IC Technology (SSI) का प्रयोग किया गया था। SSI पूरा नाम Small Scale Integration है। इसमें हाई लेविल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है। इसमें मेमोरी के तौर पर चुम्बकीय डिस्क का प्रयोग किया जाने लगा था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों की मदद से मल्टीप्रोग्रामिंग (Multi Programme) एवं मल्टी प्रोसेसिंग (Multi Processing) सम्भव हो गया । इस पीढ़ी के मुख्य कम्प्यूटर थे 1BM-360. IBM-370 (Series), ICL- 1900 एवं (Series), बरोज 5700 6700 तथा 7700 (Series). – (CDC-3000-6000) तथा (Series) यूनिवेक 9000 श्रृंखला, हनीवेल – 6000 तथा 200 PDP 11/45 आदि।
चौथी पीढ़ी (1971-1989)
कम्प्यूटर की चौथी पीढ़ी की शुरूआत 1971 से 1989 तक मानी जाती है। इस जनरेशन IC की यह तकनीकी VLSI थी इसका पूरा नाम Very Large- Scale Integration हैं। इसमें हाई लेवल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है। इसमें केवल एक सिलिकॉन चिप पर कम्प्यूटर के सभी एकीकृत परिपथ को लगाया जाता है, जिस माइक्रोप्रोसेसर कहा जाता है। इस चिपों का प्रयोग करने वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer) कहा जाता है।
पाँचवीं पीढ़ी
कम्प्यूटर की पाँचवी पीढ़ी की शुरूआत 1989 से मानी जाती है। इस जनरेशन में आईसी की आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाने लगया था। IC की यह तकनीकी ULSI थी इसका पूरा नाम Ultra Large Scale Integration है।
इसमें हाई लेवल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता है। जो अधिक सरल है। इस भाषाओं में GUI Interface का प्रयोग किया जाता है।
Input Device & Output device – Input Device –
Input Device एक ऐसा उपकार है जो कंप्यूटर को निर्देश (Command) देता है Keyboard, Mouse, Scanner, माइक्रोफोन ये सारे devices इसके कुछ उदाहरण है I
Input Device – Input Device एक ऐसा उपकार है जो कंप्यूटर को निर्देश (Command) देता है Keyboard, Mouse, Scanner, माइक्रोफोन ये सारे devices इसके कुछ उदाहरण है I
Output device – Output device वह होता है जो इनपुट डिवाइस के द्वारा दिए गए निर्देश को प्रोसेसिंग करता है I Printer, Moniter, Multimedia Sound Box इसके कुछ उदहारण है I

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Computer के क्षेत्र – Computer के मुख्य दो क्षेत्र होते है
1. Hardware
2. Software
1. Hardware –
Computer का वह भाग जिसे हम छू सकते है महसूस कर सकते है, Hardware कहलाता है I
जैसे – C.P.U. KEYBOARD, MOUSE, MONITER
2. Software –
Computer में हम जो भी कार्य करते है, Computer हमारे लिए कार्य हेतु तैयार होता है तो वह सब सॉफ्टवेयरो का ही कार्य होता है I
जैसे – Operating System, Application Software
ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) :- ऑपरेटिंग सिस्टम को यदि हम आसानी से समझना चाहे तो यह कह सकते हैं। कि हमारे शरीर में जो महत्व आत्मा का हैं कम्प्यूटर में भी वही महत्व ऑपरेटिंग सिस्टम का हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम की वजह से ही कोई भी ऑपरेटर कम्प्यूटर में कार्य करने में सक्षम होता हैं। ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर को ऑन करने के पश्चात् उस स्थिति में लाता हैं जहाँ से हम उस पर कार्य कर सकते हैं और डेटा को इनपुट तथा आउटपुट कर सकते है। यह कम्प्यूटर की सभी गतिविधियों को दिशा निर्देश देता हैं तथा उन पर अपना नियंत्रण बनाए रखता हैं।
Types of Operating System :-
MS DOS :- Microsoft Disk Operating System
Window-95 :- MS. First true multi tasking
Window-NT :- MS. Network Station
Window-98 :- Up grate to Windows95
Window-2000 :- Up grate to Windows NT
Window-ME. :- Up grate to Windows 98
Window-XP :- MS most powerful O.S.
Window-2003 :- win-XP environment O.S.
Window-Vista :- MS most powerful O.S. DVD
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Operating System |
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Application Software |
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कम्प्यूटर के मुख्य भागों का वर्णन:-
1.सी.पी.यू. (C.P.U.) :- इसका पूरा नाम सेंन्ट्रल प्रोसंसिंग यूनिट होता हैं। यह कम्प्यूटर का ब्रेन होता हैं। कम्प्यूटर की सभी डिवाइसे इसी से जुड़ी होती हैं। सी.पी.यू में ही सभी मुख्य तत्व जैसे फ्लॉपी, सीडी रोम, हार्डडिस्क, प्रोसेसर, मेमोरी आदि लगे होते हैं।
2- मॉनीटर(Monitor) :- देखने में घरेलू टेलीविजन जैसा यह उपकरण कम्प्यूटर में भेजे जा रहे और उसके द्वारा दर्षाए जा रहे समस्त संदेषों या रिपोर्टो को हमें स्क्रीन पर दिखलाता हैं। मॉनीटरों को कई भागों में बाटा गया हैं जैसे:- CRT, LCD, TFT LED आदि।
3. की-बोर्ड (Key Board) :- की-बोर्ड एक टाइपराइटर की तरह यंत्र होता हैं जिसे आप चित्र में देख रहे हैं। आजकल के नॉरमल की-बोर्ड में 105 की होती हैं। की-बोर्ड तीन प्रकार के होते हैं नॉरमल की-बोर्ड, मेकेनिकल की-बोर्ड, मेंम्बरेन की-बोर्ड तथा पिनों के हिसाब से की-बोर्ड 5 पिन नॉरमल की-बोर्ड, 6 पिन PS2 की-बोर्ड, USB की-बोर्ड वायरलेस की-बोर्ड होते हैं।
.माउस (Mouse) :- माउस एक चूहे की तरह छोटा सा यंत्र होता हैं। जो एक तार के द्वारा सी.पी.यू. से जुड़ा रहता हैं। माउस दो तरह के होते हैं बॉल वाले नॉरमल माउस तथा लेजर वाले ऑपटिकल माउस इन्हें जिस दिषा में सरकाया जाये उसी दिषा में मॉनिटर में भी आगे बढ़ते हैं।
5-स्पीकर(Speaker):- वर्तमान समय में सभी कम्प्यूटर मल्टीमीडिया कम्प्यूटर हैं। इसलिए स्पीकरों का प्रयोग सबके साथ होता हैं। कम्प्यूटर में स्पीकर को सी .पी .यू .में लगें साउण्ड कार्ड के एक जैक से जोड़ते हैं। जहाँ से हमें आवाज सुनाई पड़ती हैं।
6-स्कैनर(Scanner) :- स्कैनर भी अनिवार्य भागों की श्रेणी में आता हैं इसे हम जरूरत पड़ने पर अलग से जोड़ सकते हैं। स्कैनर के द्वारा हम किसी भी दस्तावेजों को फोटो के रूप में कम्प्यूटर पर स्केन कर सकते है।
7-वेब कैमरा (Web Camera) :- आजकल इंटरनेट का चलन बढ़ता जा रहा हैं, जिससे नई-नई ऐसेसरीज बाजार में आ रही हैं। इस कैमरे से आप फिल्म इनपुट करने से लेकर दूर बैठे व्यक्ति से इस तरह से बात कर सकते हैं जैसे आप आमने सामने बैठें हों। इसे भी सी.पी.यू. में USB पोर्ट में लगाते हैं।
8-प्रिंटर(Printer) :- प्रिंटर एक आउटपुट उपकरण हैं। हम कम्प्यूटर में स्टोर सूचनाओं को प्रिंटर के द्वारा ही कागज पर स्टोर करके देख सकते हैं। मुख्य रूप से तीन प्रकार के प्रिंटर होते हैं।
I. डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (DMP) :– इस प्रिंटर का उपयोग एकाउंटिंग के कार्यों में तथा बिल एवं टिकट बनाने के कार्यों में होता हैं। तथा इस प्रिंटर की छपाई अच्छी नहीं होती।
II. इंकजेट प्रिंटर:- यह रंगीन एवं ब्लैक एवं व्हाइट दोनों तरह की छपाई कर सकता हैं लेकिन इस प्रिंटर की गति बहुत कम होती हैं। इस कारण इसका उपयोग कम होता हैं।